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एंडोमीट्रिओसिस क्या होता है?

 एंडोमीट्रिओसिस क्या होता है?

एंडोमीट्रिओसिस एक ऐसी बीमारी है जिससे अनेक महिलाएँ परेशान रहती है और कई बार यह संतानहीनता का भी कारण बन जाती है| इस बीमारी के बारे में और उसके क्या उपचार संभव हैं इस बारे में हम प्रस्तुत ब्लॉग में जानकारी हासिल करेंगे|

यूट्रस की अंदरुनी लायनिंग को एंडोमीट्रियम कहते हैं| यह लायनिंग अगर यूट्रस के बाहर किसी अन्य जगह पर बढने लगती है तो उस अवस्था को एंडोमीट्रिओसिस कहा जाता है| यह लायनिंग ओव्हरीज या यूट्रस के पीछे की सतह, आतडें और कभीकभी फेफड़ों और त्वचा पर भी बढने लगती है| सीधे शब्दों में, अगर एक्टोपिक एंडोमेट्रियम हो याने गर्भाशय का अंदरुनी लायनिंग अपनी निश्चित जगह छोड़कर, गर्भाशय के बाहर किसी अन्य जगह पर बढ़ रहा हो तो उस स्थिती को एंडोमीट्रिओसिस कहते हैं| इस बीमारी में क्या होता है?

·         एंडोमीट्रियम अपनी निश्चित जगह के अलावा कही ओर बढता है|

·         हर महीने में जब माहवारी आती है तो गर्भाशय का यह लायनिंग बाहर निकल जाता है परंतु अगर यह निश्चित स्थान से अलग जगह पर हो तो यह बाहर निकल नहीं पाता|

·         लेकिन माहवारी के समय जहाँ भी एंडोमीट्रियम होता है वहाँ ब्लीडिंग होती है पर वह खून बाहर निकल नहीं पाता|

·         वह खून फिर वही इकट्ठा होकर जम जाता है| ओव्हरी में जो खून की गठानें बनती हैं उन्हें चॉकलेट सिस्ट कहा जाता है| कभी कभी यूट्रस के पीछे, आतड़ों में, पेशाब की थैली में भी एंडोमीट्रियम की गठानें बन जाती हैं|

अब देखते हैं कि एंडोमीट्रिओसिस के लक्षण क्या होते हैं:

·         जैसे जैसे यूट्रस के बाहर खून की गठानें बन जाती हैं तो महिला को दर्द होता है| यह दर्द माहवारी के पहले, माहवारी के दिनों में और कभीकभी माहवारी के बाद भी बना रहता है|

·         साथ ही, पेशाब, मलविसर्जन या संभोग करते समय भी दर्द हो सकता है|

·         बहुत ज्यादा रक्तस्राव होना भी एंडोमीट्रिओसिस का लक्षण है|

·         कभीकभी सायलेंट एंडोमीट्रिओसिस में अन्य कोई लक्षण दिखाई नहीं देता पर एक ही लक्षण दिखाई देता है; संतानहीनता! संतानहीनता का उपचार करने के लिए जब जाँच की जाती है तब एंडोमीट्रिओसिस का पता ऐसे केसेस में लगता है|

एंडोमीट्रिओसिस का उपचार:

·         यदि एंडोमीट्रिओसिस के साथ संतानहीनता होती है तो उसका उपचार लॅप्रोस्कोपी से किया जा सकता है| लॅप्रोस्कोपी में दूरबीन को नाभि से अंदर डालकर यूट्रस, बाहरी सतह, ट्यूब्ज और अन्य जगहों पर भी जो एंडोमीट्रियम के डिपॉझिट होते हैं उनका परीक्षण किया जाता है| जहाँ तक संभव होता है इन डिपॉझिट्स को साफ किया जाता है| चॉकलेट सिस्ट को ड्रेन करके उनकी सिस्टवॉल निकाली जाती है| फिर एंडोमीट्रिओसिस की ग्रेडिंग की जाती है|

·         एंडोमीट्रिओसिस के चार ग्रेड होते हैं : मिनिमल (बहुत कम), माइल्ड (कम), मॉडरेट (मध्यम) और सिव्हिअर (बहुत ज्यादा) याने ग्रेड १,,,४|

·         यदि ग्रेड १ या २ का एंडोमीट्रिओसिस है तो लॅप्रोस्कोपी से इसका पूरी तरह से उपचार हो सकता है और फिर नैसर्गिक प्रसूती भी संभव हो सकती है|

·         यदि ग्रेड ३ या ४ का एंडोमीट्रिओसिस होता है (१६ या ४० से अधिक स्कोअर) तो ऐसे केसेस में टेस्टट्यूब बेबी की ही सलाह दी जाती है|

 

एंडोमीट्रिओसिस का असर अंडों की गुणवत्ता और संख्या पर पडता है| इससे संतान प्राप्त करने में दिक्कत होती है| यदि किसी महिला को एंडोमीट्रिओसिस के उपर्युक्त लक्षणों में से कुछ दिखाई देते हैं तो तुरंत डॉक्टर से जाँच करवाके उपचार करवाने चाहिए और इनफर्टिलिटी ट्रीटमेंट भी समय बरबाद किए बिना लेना चाहिए| एंडोमीट्रिओसिस रोका तो नहीं जा सकता पर नियंत्रण में रखा जा सकता है| आश्चर्य की बात होती है कि प्रेग्नंसी से एंडोमीट्रिओसिसका बडी हद तक इलाज होता है| प्रेग्नंसी के बाद यह समस्या ५०-८०% कम हो जाती है| लेकिन विरोधाभास यह है कि एंडोमीट्रिओसिस ही संतानहीनता का कारण हो सकता है| अत: लक्षण दिखने पर बिना समय गवाएँ यदि उपचार लिए जाते हैं तो यह समस्या निश्चित रूप से दूर की जा सकती है|

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