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एडीनोमायोसिस

 एडीनोमायोसिस

महिलाओं को कई प्रकार की स्वास्थ्य विषयक समस्याएँ सताती रहती हैं| इनमें से एक है एडीनोमायोसिस! इस ब्लॉग में हम तीन विषयों की जानकारी प्राप्त करेंगे:

·         एडीनोमायोसिस के लक्षण

·         एडीनोमायोसिस के कारण

·         एडीनोमायोसिस के उपचार

एडीनोमायोसिस के लक्षण:

       आम तौर पर यह समस्या महिलाओं में ४० या ५० की उम्र के बाद देखी जाती है| इस के प्रमुख लक्षण कुछ इस प्रकार के होते हैं:

·         माहवारी के समय बहुत तेज दर्द होना: यह दर्द इतना तीव्र होता है कई महिलाएँ २-३ दिन तक अपने रोज के कामकाज नहीं कर पाती, बेडरेस्ट लेनी पडती है और कई बार अस्पताल में भर्ती होकर भी दर्द-निवारक दवाइयाँ लेनी पडती है| सामान्यत: यह दर्द ३५ की उम्र के बाद शुरू होता है और १० प्रतिशत महिलाओं में ४५ तक की उम्र तक यह समस्या देखने को मिलती है|

·         माहवारी में बहुत ज्यादा खून बहना याने मेनोरेजिया हो जाना|

एडीनोमायोसिस के कारण:

·         यूट्रस की दो परतें होती हैं| अंदर की जो परत होती है उसे एंडोमीट्रियम कहा जाता है| बाहर की परत को मायोमीट्रियम कहा जाता है| यह परत स्नायु से बनी होती है| इस बाहरी परत में कभीकभी एंडोमीट्रियम के छोटे छोटे हिस्से बढने लगते हैं याने ये दोनों परतें उलझ जाती हैं|

·         ऐसा होने से माहवारी के दौरान, मसल या स्नायु के स्तर में भी ब्लीडिंग होने लगती है| यह ब्लीडिंग बाहर नहीं आ सकता| इससे उस मसल लेयर में सूजन आ जाती है और इसलिए माहवारी के दौरान या तुरंत बाद, बहुत तेज दर्द महिला को होता है| यह दर्द प्रसूती वेदना जितना तीव्र होता है|

·         इस लगातार होनेवाली परेशानी से यूट्रस का साइज धीरेधीरे बढने लगता है| यूट्रस का साइज बढने की वजह से माहवारी का स्राव भी कुछ महिलाओं में बहुत बढता है| इसी से मेनोरेजिया हो जाता है|

एडीनोमायोसिस उन महिलाओं में देखा जाता है जिनकी एक या दो डिलीव्हरी हो चुकी है या किसी कारण गर्भाशय की सफाई हुई है| सफाई प्रक्रिया में एंडोमीट्रियम भग्न हो जाता है और उसके कुछ सेल मायोमीट्रियम में जाकर बढने लगते हैं|

   आजकल संतानहीनता से परेशान महिलाओं में भी एडीनोमायोसिस देखा गया है|

एडीनोमायोसिस का उपचार:

·         पुराने जमाने से इसका इलाज देखा गया है बच्चेदानी को निकालकर जड से समस्या का निवारण करना!

·         आजकल डायनोजेस्ट नाम की एक दवा उपलब्ध है| यह प्रोजेस्टेरोन अॅनॅलॉग दवाई है और इसका रोज २ मिलिग्राम का डोस होता है| यह तीन से छ: महीने लगातार या इससे ज्यादा भी लिया जा सकता है| इससे, मायोमीट्रियम के अंदर जो एंडोमीट्रियम के अंश होते हैं वे धीरेधीरे सूख जाते हैं| इससे २-४ महीने के बाद दर्द कम हो जाता है और छ: महीने बाद यूट्रस का साइझ भी कम होने लगता है| इसीलिए जिनकी उम्र कम है या जो किसी कारण यूट्रस निकलना नहीं चाहती, उन महिलाओं के लिए डायनोजेस्ट वरदान जैसा है|

·         ‘मिरेना’ भी उपचार का एक पर्याय है| यह एक कैपसूल होता है जो रोज थोडाथोडा प्रोजेस्टेरोन यूट्रस में स्रवित करता है| यह कॉपर टी जैसा एक डिव्हाइस या यंत्र होता है जो हार्मोन को थोड़ी थोड़ी मात्रा में रिलीज करते रहता है| इस से भी यूट्रस का साइझ कम होता देखा जाता है|

·         इन उपचारों के कारण हिस्टरेकटोमी टाली जा सकती है और फिर भी एडीनोमायोसिस का उपचार हो सकता है| जिन महिलाओं को ये दवाइयाँ किसी कारण से नहीं लेनी, उनके लिए हिस्टरेकटोमी के लिए लॅप्रोस्कोपी का भी एक अच्छा पर्याय उपलब्ध है| इसमें दूरबीन से बच्चेदानी को निकाला जाता है| यह बहुतही आसान और सुरक्षित शस्त्रक्रिया होती है, दो दिन में अस्पताल से छुट्टी मिल सकती है और ५-६ दिन के परहेज के बाद हफ्तेभर में महिला अपने रोज के कामकाज करने के लिए समर्थ हो जाती है|

एडीनोमायोसिस के कारण जानकर इसका सही इलाज किया जा सकता है| यह स्थिती कैंसरस बिलकुल नहीं है| नई तकनीको के कारण इसका उपचार सुलभ और सुरक्षित हो गया है| इसीलिए इस बीमारी से डरने की या दर्द सहते रहने की बिलकुल आवश्यकता नहीं| तुरंत अपनी समस्या लेकर डॉक्टर के पास जाने से इसका उपचार किया जा सकता है|

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