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क्या है PCOS की बीमारी और कैसे करें उसका सामना!

  क्या है  PCOS  की बीमारी और कैसे करें उसका सामना! आजकल  PCOS  याने पॉलीसिस्टिक ओव्हरी सिंड्रोम से कई महिलाऐं परेशान होती है और इसके कारण संतानहीनता भी हो सकती है| सब से पहले हम जान लेंगे कि यह बीमारी क्या होती है ? ·           यदि किसी महिला की माहवारी अनियमित हो याने, देर से आती हो या रुक गयी हो ,  चेहरे पर मुहासें आए हो ,  शरीर और चेहरे पर बाल आए हो या बाल झड रहे हो और यदि सोनोग्राफी में अंडाशय में १० मिमि के छोटे छोटे फोलिकल दिखायी दे रहे हो, तो इन तीन में से अगर दो लक्षण भी हो ,  तो महिला को यह समस्या है ऐसा माना जाता है| ·           PCOS  की समस्या के ,  महिला के शरीर पर कई प्रकार के असर होते हैं पर सबसे समस्यापूर्ण परिणाम होता है संतानहीनता| ·           अंडाशय में जो फोलिकल होते हैं उसमें से एक सामान्यरूप से पक्व होकर हर महीने में बाहर निकलता है| इस बीमारी से परेशान महिलाओं में यह डिम्बाणु अंडाशय ...

लैप्रोस्कोपी शस्त्रक्रिया: एक वरदान

 निराश ना हो: लैप्रोस्कोपी से फायब्रॉइड्स का इलाज हो गया आसान! हमारे अब तक के ब्लॉग्ज से आप जान चुके हैं कि फायब्रॉइड्स की वजह से संतानहीनता हो सकती है| पर यह भी यकीनन सही है कि इनका इलाज हो सकता है और फायब्रॉइड्स होकर भी संतानसुख प्राप्त किया जा सकता है| जब महिला के शरीर में कुछ ऐसे फायब्रॉइड्स होते हैं जिनका साइझ और स्थान संतानप्राप्ती में समस्या कर रहे हो तो उन्हें निकालना आवश्यक हो जाता है| पहले तो इसके लिए पेट को खोलकर शस्त्रक्रिया करने का एकमेव पर्याय उपलब्ध था| पर आज, लैप्रोस्कोपिक मायोमेक्टमी याने दूर्बीन से की जानेवाली शस्त्रक्रिया की वजह से इस क्षेत्र में क्रांती आयी है|  फायब्रॉइड्स याने बच्चेदानी की गठानें या ट्यूमर्स होते हैं| इसकी वजह से ज्यादा ब्लीडिंग होना, लंबे समय तक माहवारी चलती रहना, दर्द होना तथा संतानहीनता होना; ये समस्याएँ आम तौर पर देखी जाती है| फायब्रॉइड्स निकालने के बाद अक्सर प्रेग्नंसी रह जाती है और इसलिए फायब्रॉइड्स का प्रकार, स्थान और साइझ देखकर इन्हें निकालना जरूरी हो जाता है| लैप्रोस्कोपिक मायोमेक्टमी में यूट्रस को बिलकुल नुकसान पहुँचाए बिना ये ग...

क्या फायब्रोइड होना याने संतानहीनता??

 क्या फायब्रॉइड्स याने संतानप्राप्ती में निराशा? क्या संतानहीनता का एक कारण फायब्रॉइड्स हो सकता है? यह सवाल अनेक महिलाओं को सताता रहता है| आज हम देखेंगे: • क्या फायब्रॉइड्स या बच्चेदानी की गठानों की वजह से संतानहीनता होती है? • अगर किसी महिला को यह शिकायत है तो उसका उपचार कैसे किया जा सकता है? • फायब्रॉइड्स किस तरह से संतानहीनता का कारण बनते हैं? फायब्रॉइड्स याने यूट्रस की गठानें बहुत की आम समस्या है| ३० से ४० आयु की ३०% महिलाओं को इन गठानों की समस्या होती है और ५-१०% महिलाओं को संतानहीनता होती है| उसमें से कई महिलाओं को फायब्रॉइड्स भी होते हैं| तब उनके सामने दो प्रकार की समस्याएँ होती हैं कि क्या फायब्रॉइड्स की वजह से संतानहीनता हो रही है और दूसरी समस्या यह होती है कि फायब्रॉइड्स को पूरी तरह से नजरंदाज करके संतानहीनता के उपचार किए जाते हैं और इसलिए अपेक्षित फल प्राप्त नहीं होता है| यह समझना इसीलिए बेहद जरूरी है कि कौनसे फायब्रॉइड्स की वजह से संतानहीनता होती है|  इन फायब्रॉइड्स का उपचार कैसे किया जा सकता है और फिर संतानहीनता की समस्या कैसे सुलझायी जा सकती है| यह समझ लेना...

फायब्रॉइड के कारण, लक्षण और उपचार

  फायब्रॉइड के कारण ,  लक्षण और उपचार महिलाओं के स्वास्थ्य समस्याओं की बात की जाए, तो जुलाई महीने की एक विशेष पहचान है| जुलाई का महीना फायब्रॉइड अवेअरनेस मंथ याने फायब्रॉइड के विषय में जागृती लानेवाले महीने के रूप में जाना जाता  है| इस समस्या से परेशान सभी महिलाओं को सहयोग देने  का , इस विषय  में उन्हें सही और अधिक जानकारी देने का इस महीने में हमारा प्रयास है| फायब्रॉइड क्या होता है ? फायब्रॉइड याने बच्चेदानी की गठानें होती हैं| ये गठानें कॅन्सर की नहीं होती; बेनाइन होती हैं| फायब्रॉइड को गठान या रसौली जैसे नाम से जाता है| यह समस्या इतनी आम है कि ३० से ४० की आयु में ३० प्रतिशत महिलाओं को यह शिकायत होती है| फायब्रॉइड के प्रकार: बच्चेदानी की दो परतें होती हैं: अंदरी परत एंडोमेट्रीयम और बाहरी मायोमेट्रीयम! इनमें जो स्नायु की परत होती है ,  वहाँ से ये ट्यूमर या गठानें निकालने लगती हैं| अगर ये गठानें अंदर की परत की ओर बढती है तो उन्हें सबम्यूकस कहा जाता है ,  दोनों परतों के बीच हो तो इंट्रा-म्यूरल कहा जाता है और बाहर की तरफ हो तो सबसिरस फायब्रॉइड कहा जाता ह...

नैसर्गिक रूप से फर्टिलिटी कैसे बढ़ाएँ

  नैसर्गिक रूप से फर्टिलिटी कैसे बढ़ाएँ किसी भी दंपती की यही मनोकामना होती है कि उन्हें नैसर्गिक रूप से गर्भाधान हो और सुरक्षित ,  स्वास्थ्यपूर्ण गर्भावस्था और प्रसूती हो| नैसर्गिक रूप से संतान प्राप्त करने के लिए ,  महिला और पुरुष दोनों को कुछ बातों की जानकारी होना और कुछ बातों में सावधानी रखना अनिवार्य होता है| इसी विषय की समग्र जानकारी इस ब्लॉग में दी गयी है| महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण बातें: नैसर्गिक रूप से गर्भाधान होने के लिए ,  निम्नलिखित बातें बहुत आवश्यक होती हैं: १.         एग या बीज अच्छी गुणवत्ता का और स्वस्थ हो और ओव्ह्युलेशन, निरामय और नियमित हो| २.         फॅलोपियन ट्यूब्ज खुली और सक्रिय हो| उनमें कोई रुकावट या समस्या ना हो| ३.         गर्भाशय स्वस्थ हो| उसमें फायब्रॉइड की वृद्धी या टीबी का इन्फेक्शन ना हो| ओव्ह्युलेशन में समस्या होने के दो प्रमुख कारण हो सकते हैं: १.         PCOS  (पॉलीसिस्टिक ओव्हरी सिंड्रोम):...

गर्भाधान की पूर्वतैयारियां

  गर्भाधान की पूर्वतैयारियाँ प्रेग्नंसी  होने के  बाद डॉक्टर  को  दिखाने के लिये आने वाले दंपतियों में एक बात समान होती है  −  ज्यादातर दंपती आकस्मिक रूप से गर्भाधान हो जाने के बाद ही डॉक्टर के पास आते हैं| वास्तविक ,  गर्भाधान हर व्यक्ती के जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना है और इसके लिए सामाजिक ,  शारीरिक ,  आर्थिक ,  मानसिक तैयारी करके यह निर्णय लेना बहुत आवश्यक है| जैसे कि विवाह से पहले हम पूछताछ करते हैं ,  कुंडलियों का और अन्य बातों का मेल परखते हैं, वैसे ही गर्भाधान के विषय में जागरूकता दिखाना भी आवश्यक है| यदि दंपती, गर्भाधान का निर्णय विचारपूर्वक लें और प्रयास करने से पहले डॉक्टर से मिलें तो कई समस्याओं का समय पर समाधान किया जा सकता है| इससे गर्भावस्था और प्रसूती सुरक्षित हो ती है  और जच्चा-बच्चा स्वस्थ रह ते हैं | परिवार शुरू करने से पहले जैसे नये जीव के स्वागत के लिए मानसिक तैयारी ,  साथ ही आर्थिक तैयारी करना जरूरी है ,  वैसे ही उत्तम गर्भावस्था के लिए  कुछ वैद्यकीय तैयारियाँ करना भी आवश्यक होता है| वैद...

एडीनोमायोसिस

  एडीनोमायोसिस महिलाओं को कई प्रकार की स्वास्थ्य विषयक समस्याएँ सताती रहती हैं| इनमें से एक है एडीनोमायोसिस! इस ब्लॉग में हम तीन विषयों की जानकारी प्राप्त करेंगे: ·           एडीनोमायोसिस के लक्षण ·           एडीनोमायोसिस के कारण ·           एडीनोमायोसिस के उपचार एडीनोमायोसिस के लक्षण:        आम तौर पर यह समस्या महिलाओं में ४० या ५० की उम्र के बाद देखी जाती है| इस के प्रमुख लक्षण कुछ इस प्रकार के होते हैं: ·           माहवारी के समय बहुत तेज दर्द होना: यह दर्द इतना तीव्र होता है कई महिलाएँ २-३ दिन तक अपने रोज के कामकाज नहीं कर पाती, बेडरेस्ट लेनी पडती है और कई बार अस्पताल में भर्ती होकर भी दर्द-निवारक दवाइयाँ लेनी पडती है| सामान्यत: यह दर्द ३५ की उम्र के बाद शुरू होता है और १० प्रतिशत महिलाओं में ४५ तक की उम्र तक यह समस्या देखने को मिलती है| ·      ...